*के०एम०जी० मन की बात भाग-१४* आज में *कमलेश मान्टा के०एम०जी०* आप सभी से माँ बाप की लघु भूमिका बताता हूँ। शीर्षक- *आज के समय में बच्चों के लिए माँ बाप का स्थान*
अधिकतर देखा जाता हैं कि एक बच्चा अपने माँ बाप से अलग रहते हैं।जब माँ बाप बुढ़ापे तक पहुंच जाते है तो उनको किसी का सहारा नही मिलता।आज के समय मे देखा जाये तो बच्चे अपने ममी पापा की बात नही मानते।
माँ बाप के चरणों मे स्वर्ग है । मै न मन्दिर जाता हूँ न मस्जिद मेरे भगवान तो घर में है और वो मेरे ममी पाप ही है।आज हम जहाँ भी है जैसे भी है सिर्फ माँ बाप की वजह से है।
माँ बाप को कष्ट देना मतलब भगवान को कष्ट देना होता है।
कुछ भी गलत करने से पहले हम भगवान से डरते है लेकिन माँ बाप से नही। भगवान दुःखी हो वो नही दिखते लेकिन माँ बाप दुःखी हो वो तो दिखते हैं फिर क्यों एक बच्चा अपने माँ बाप को दुःख देते हैं क्यों गलत काम करते हैं क्यों जुठ बोलते है क्यों उनसे अलग होते हैं
माँ बाप ने अपने सहारे के लिए बच्चे को पाला होता है लेकिन वो बच्चा माँ बाप को घर से निकाल देता है।
आज कल के बच्चे नशे में इतना डुब चुके हैं कि उन्हें मा बाप की कोई परवाह नही है।
एक आदर्श बेटा वही है जो सबको अपने माँ बाप की तरह समझे अपने माँ बाप की तरह उनकी सेवा करें।
हर बच्चे अपने माँ बाप से प्यार करते है लेकिन जुठ भी बोलते है।
मेरी सोच मेरे विचार आप सब तक।
धन्यवाद।
*कमलेश मान्टा के०एम०जी०*
रोहड़ू क्षेत्र से...

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